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लाल-किताब ज्योतिष और बच्चों की शिक्षा व करियर चयन :

Updated: Oct 14, 2024

लाल-किताब ज्योतिष के अनुसार, बच्चों की शिक्षा और करियर के क्षेत्र में ग्रहों का महत्वपूर्ण

प्रभाव होता है। शिक्षा और करियर की दिशा में माता-पिता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण

होती है, लेकिन ज्योतिष भी इस चयन को प्रभावित करता है।


ग्रहों का प्रभाव:

बुध (Mercury) और बृहस्पति (Jupiter) ग्रह शिक्षा और बुद्धि पर सबसे अधिक प्रभाव डालते हैं।

बुध बुद्धि, सोच और समझदारी का कारक होता है। इसके प्रभाव से बच्चों की मानसिक

क्षमताएं प्रभावित होती हैं।

बृहस्पति शिक्षा और ज्ञान का कारक होता है। जब बृहस्पति कुंडली में अच्छे स्थान पर होता

है, तो शिक्षा के क्षेत्र में अच्छे परिणाम मिलते हैं।


बृहस्पति और बुध की स्थिति:

यदि बृहस्पति पंचम भाव (Education) के स्वामी के साथ त्रिकोण या केंद्र में स्थित होता है,

तो जातक को शिक्षा के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है।

जब बुध और बृहस्पति एक साथ अच्छे स्थान पर शुभ अवस्था में होते हैं, तो यह व्यक्ति को

बड़े शैक्षिक उपलब्धियों की ओर मार्गदर्शित करता है।


शिक्षा पर ग्रहों का प्रभाव:

ग्रहों की स्थिति यह तय करती है कि बच्चे को किस तरह के अवसर मिलेंगे और उनकी

पढ़ाई में सफलता कैसी होगी।शिक्षा के क्षेत्र में सफलता पाने के लिए महत्वपूर्ण है कि इन

ग्रहों की स्थिति और प्रभाव को समझा जाए और उसके अनुसार उपाय किए जाएं।

लाल-किताब ज्योतिष में ग्रहों के इस प्रभाव को समझकर माता-पिता बच्चों की शिक्षा और

करियर में सही दिशा प्रदान कर सकते हैं।


दूसरे, चौथे, और पंचम भाव का शिक्षा और करियर पर प्रभाव :


1. दूसरा भाव (2nd House):

दूसरा भाव शिक्षा के प्रारंभिक स्तर पर प्रभाव डालता है और वाणी, संवाद और सीखने की क्षमता को दर्शाता है। यदि दूसरे भाव में शुभ ग्रह जैसे बुध, सूर्य या शुक्र हो, तो बच्चे को अच्छी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त होती है। यह बच्चे की वाणी को मधुर और संवाद में कुशल बनाता है। यदि इस भाव में मंगल, राहू या शनि जैसे अशुभ ग्रह हों, तो बच्चे की वाणी में कड़वाहट हो सकती है, और उसकी पढ़ाई में रुचि कम हो सकती है।

2. चौथा भाव (4th House):

चौथा भाव संवेदनशीलता और भावनात्मक शिक्षा से संबंधित है। यह भाव सामाजिक, दार्शनिक और भावनात्मक क्षेत्रों में शिक्षा को दर्शाता है। यदि चौथे भाव में सूर्य, चंद्रमा या बृहस्पति हो, तो बच्चा सामाजिक, आध्यात्मिक या दार्शनिक शिक्षा प्राप्तकरेगा। बुध और शुक्र का चौथे भाव में होना संकेत करता है कि बच्चा राजनीति या प्रशासन में शिक्षा हासिल करेगा। सूर्य और बुध का चौथे भाव में होना गणित या ज्योतिष में सफलता का संकेत है। बृहस्पति का उच्च या अपने घर में होना कानूनी शिक्षा के लिए अच्छा होता है।

3. पंचम भाव (5th House):

पंचम भाव बुद्धि, शिक्षा और करियर के निर्णयों को दर्शाता है। यह भाव शिक्षा के गहराई और क्षेत्र को निर्धारित करता है। अगर पंचम भाव मजबूत हो और इसमें सूर्य या अन्य शुभ ग्रह हों, तो व्यक्ति तकनीकी, वैज्ञानिक या मेडिकल शिक्षा में सफल हो सकता है।

पंचम भाव में सूर्य और राहू का होना तकनीकी और वैज्ञानिक शिक्षा का संकेत है।


इन तीनों भावों के माध्यम से, लाल-किताब ज्योतिष यह निर्धारित करता है कि व्यक्ति की

शिक्षा और करियर की दिशा कैसी होगी, और ग्रहों की स्थिति और प्रभाव इन क्षेत्रों में

महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


शिक्षा को प्रभावित करने वाले अन्य कारक :

1. दशम भाव (10th House) का प्रभाव: जब दशम भाव में उपस्थित ग्रह चतुर्थ भाव पर दृष्टि

डालते हैं, तो यह व्यक्ति की भावनात्मक ताकत को प्रभावित करता है।


विशेष ग्रहों का प्रभाव:

सूर्य, मंगल और राहू: अगर ये ग्रह दशम भाव में हैं, तो व्यक्ति का झुकाव राजनीति, विज्ञान या प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में होता है।

सूर्य, चंद्रमा और शनि: इन ग्रहों की दशम भाव में उपस्थिति आध्यात्मिक लेखन और विचार में रुचि को संकेत देती है।

बृहस्पति और बुध: ये ग्रह दशम भाव में होने पर व्‍यापार और कॉमर्स में शिक्षा की ओर इशारा करते हैं।

चंद्रमा और शुक्र: इन ग्रहों की दशम भाव में उपस्थिति ऐस्‍थेटिक या कला से जुड़े पेशे में

करियर बनाने का संकेत देती है।


2. ग्यारहवां भाव (11th House) का प्रभाव: अगर ग्यारहवें भाव में शुभ ग्रह स्थित हैं और ये

पंचम भाव पर दृष्टि डालते हैं, तो व्यक्ति को शिक्षा के किसी भी क्षेत्र में अच्छा परिणाम

मिलता है।

ग्यारहवें भाव में अशुभ ग्रह होने पर शिक्षा में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं, जिससे पढ़ाई में

कठिनाइयां आ सकती हैं।


इन कारकों से स्पष्ट होता है कि दशम और ग्यारहवें भाव में ग्रहों की स्थिति और दृष्टि

शिक्षा के चयन और सफलता को कैसे प्रभावित करती है। ग्रहों की यह स्थिति व्यक्ति की

शिक्षा की दिशा और गुणवत्ता को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

लाल-किताब ज्योतिष के अनुसार शिक्षा और करियर क्षेत्र का चयन जन्म कुंडली में ग्रहों की स्थिति और उनका प्रभाव यह तय करता है कि किसी व्यक्ति के लिए किस क्षेत्र में करियर बनाना उपयुक्त रहेगा। विभिन्न ग्रहों की स्थिति के आधार पर होती हैं।


शिक्षा और करियर के क्षेत्र को निम्नलिखित तरीके से समझा जा सकता है:

1. सूर्य की स्थिति: यह इंजीनियरिंग, चिकित्सा, राजनीति विज्ञान या कानून से संबंधित करियर

में उत्कृष्टता दर्शाता है।

2. चंद्रमा की स्थिति:10वें या 5वें भाव में चंद्रमा: यह रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, होटल

मैनेजमेंट, पर्यटन, संगीत, मरीन इंजीनियरिंग या नृत्य से संबंधित शिक्षा प्राप्त करने का संकेत

देता है।

3. मंगल की स्थिति: (विशेषकर पराक्रम भाव में): यह सेना, भौतिकी, राजनीति विज्ञान, कंप्यूटर

हार्डवेयर या इलेक्ट्रॉनिक्स में अच्छी शिक्षा प्राप्त करने का प्रतिनिधित्व करता है।

4. बुध की स्थिति: यह कॉमर्स, चार्टर्ड अकाउंटेंसी, कंपनी सचिव या सामाजिक विज्ञान से

संबंधित अध्ययन का संकेत देता है।

5. बृहस्पति की स्थिति: यह भाषा के क्षेत्र (जैसे हिंदी, संस्कृत), सामाजिक विज्ञान, राजनीति

विज्ञान, दर्शनशास्त्र, पत्रकारिता, गुरु या शिक्षा के क्षेत्र और अन्य संबंधित क्षेत्रों की ओर झुकाव

दर्शाता है.

6. शुक्र की स्थिति: यह सॉफ्टवेयर विकास, होटल प्रबंधन, पर्यटन, नृत्य, संगीत, वनस्पति विज्ञान

या संचार जैसे क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन करने का संकेत देता है। यदि शुक्र शनि के साथ हो, तो

व्यक्ति की संस्कृत के प्रति रुचि अधिक हो सकती है।

7. शनि की स्थिति: यह कंप्यूटर हार्डवेयर, विदेशी भाषाओं, कानून, दर्शन आदि के अध्ययन से

संबंधित होता है।

8. राहु की स्थिति: यह कंप्यूटर हार्डवेयर, मेडिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, गणित या कानून से संबंधित

अध्ययन में विशेषज्ञता प्राप्त करने का संकेत देता है।

9. केतु की स्थिति: यह भौतिकी, राजनीति विज्ञान, कंप्यूटर हार्डवेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स या अन्य

संबंधित क्षेत्रों में शिक्षा प्राप्त करने का संकेत देता है।

इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए, किसी भी बच्चे की जन्म-कुंडली का विश्लेषण

करके उसके लिए सही करियर का चुनाव किया जा सकता है, जो उसके भविष्य को सफल

और सुखद बना सकता है।


यदि आप अपने बच्चों के सफल करियर क्षेत्र के बारे में जानना चाहते हैं, तो हमारे संस्थान के

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